* दाहोद का इतिहास :
- भारत देश के गुजरात राज्य के पूर्व सरहद पर बसे हुवे पंचमहाल जिले मे से विभाजित होकर दि. ०२/१०/१९९७ में अस्तित्व में आया हुवा गुजरात का पूर्व द्वार यानि हमारा दाहोद जिला...! दाहोद को ऋषि दधिचि की तपोभूमि एवं देहवध के नाम से भी जाना जाता है ! कहा जाता है की जब देव और दानवो के युद्ध के समय देवताओ को वज्र जैसे शस्त्र बनाने के लिये ऋषि दधिचि की अस्थियो की आवश्यकता पडी तब ऋषि दधिचि ने यही पर अपने देह का वध स्वयं ही कीया था, इसलिये दाहोद को देहवध भी कहा जाता है !
- दाहोद मालवा और राजस्थान दोनो की हदो के बीच में आया हुआ है, जिस कारण इसे पेहले दोहद कहा जाता था बाद में दाहोद के नाम से प्रसिद्ध हुआ ! मुगल बादशाह औरंगझेब की जन्मभुमि, गढी का किला, पाटण के राजा सिद्धराज जयसिंह के द्वारा एक ही रात में छाब से मीट्टी निकाल कर बनाया हुआ छाब तालाब, खजुराहो की याद दिलानेवाला बावका का मंदिर, पाटाडुंगरी जलाशय और १९२२-२३ में भीलसेवा मंडल के स्थापक ठक्करबापा, गुरुजी डाह्याभाइ नायक, गीरधर नगर शेठ आदि की कर्मभूमि यानी दाहोद !
- रतनमहाल के वन्यप्राणीयो का अभ्यारण्य, कालीडेम के केदारनाथ महादेव मंदिर का मेला, देवझरी का शिवरात्रि का मेला, झालोद के रणीयार गाँव का चुल का मेला एवं जेसावाडा का मेला आदि दाहोद जिले की विशेषताएँ है ! आओ सब मिलकर इस जिले को और भी बेहतर बनाये...!



